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Showing posts from January, 2022

सोने की चिड़िया

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तू थी सोने की चिड़िया, तेरी थी धानी चुनरिया। स्वच्छ स्वच्छंद बहती थी नदियां, मंगल गान सुनाती थी कोयलिया।। मधुर - मधुर गरजते थे मेघ, हरियाली फैली थी चहुं ओर। खग मृग करते थे कोलाहल, जंगल मे भी होती थी भोर।। बहती थी मदमस्त हवाएं, मीलो पैदल चलते थे लोग। पगडंडियों से करते थे बातें, प्रफुल्लित मन नही था कोई रोग।। छल कपट से थे सब कोसो दूर, दिलो में अपनापन था भरपूर। प्यार बरसता था हर आंगन, जैसे झम-झम बरसते थे बादल।। ना तेरा मेरा का था किस्सा, ना रहता था कोई भूखा नंगा। परिंदों का भी था खुशनुमा बसेरा, धरती आकाश पर ना था पहरा।। समय भी चलता था धीरे-धीरे, उदित सूर्य की मिठी थी किरणे। समय का ना आभाव था, चित्त हर हाल मे खुशहाल था।। माटी की सोंधी सोंधी खुशबू , भाती थी हर जन-मन को। ना जाता था कोई परदेश, प्रिय था अपना देश सबको।। वसुंधरा को सब चूमते थे, माता- पिता को पूजते थे। नारी का होता था सम्मान, बाला का देवी सा था मान।। बच्चा - बच्चा गाता था, शूरवीरो की जय गाथा। हर बालक में बसते थे महाराणा प्रताप, बाला में थे लक्ष्मीबाई के जज़्बात।।

#बालकविता नेता जी बन जाऊं

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गणतंत्र दिवस की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम🇮🇳🇮🇳 मां मुझको सिलवा दो, एक कुर्ता-पजामा। और मंगवा दो, टोपी नेताजी वाला।। जिसे पहन कर मै, नेता जी बन जाऊं। अपनी टोली संग, भाषण देने जाऊं।। अत्याचार न होने दूं, सबका हक दिलवाऊं। बेबस लाचार गरीबो का, सपना पूरा कर जाऊं।। चारो दिशाओं मे, तिरंगे की शान बढाऊं। भारतीय संस्कृति का, डंका मैं बजाऊं।। नेता जी का नारा, सबको याद दिलाऊं। खून का कतरा-कतरा, देश के लिए बहाऊं।।

सुभाष चंद्र बोस

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सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस पर सादर श्रद्धांजलि 🙏🙏 जय हिन्द 🇮🇳🇮🇳 तेइस जनवरी अठारह सौ सत्तानवे, ओडिशा के कटृक गांव मे जन्मे। देश प्रेमी स्वाभिमानी दृढनिश्चयी, सुभाष थे महान स्वतंत्रता सेनानी।। राष्ट्र के लिए स्वाधिनता सर्वोपरि, तरूणों में प्रवाहित किया मूलमंत्र। युवाओं की सोई आत्मा को जगाकर, आजादी को बना दिया आतमप्रतिष्ठा का प्रश्न।। पूर्ण स्वाधीनता ही बन गया, जिसके जीवन मरण का प्रश्न। जय हिन्द दिल्ली चलो का नारा देकर, आजाद हिंद फौज का किया गठन।। बहादुर बनो करो संघर्ष, क्योंकि स्वतन्त्रता है निकट। ऐसे विचारों से तैयार किया, आजादी के दीवानों की फौज।। वह इन्सान नही तूफान था, जो बंधनों मे नही बधं सकता था। निकल गया वह गोरों के चंगुल से, निकल गया वह दृढ़ प्रतिज्ञ सेनानी था।। परमवीर साहसी निर्भीक निडर,  था भारत मां का सच्चा सपूत। कर दिया समर्पित जीवन सम्पूर्ण, सुभाष चंद्र बोस हो गया अमर।। वह था वीर त्यागी बलिदानी, उसको याद रखेगा हर भारतवासी। आजादी की मशाल जलाकर, सो गया अमर सेनानी।।

भारत की पहचान हिंदी

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विश्व हिन्दी दिवस की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं एक ही नदी के दो किनारे, हैं हिन्दी 'औ' संस्कृत। मधुर रस लिए बहती कलकल, हैं हिन्दी 'औ' संस्कृत।। दोनो का हुआ मिलन, भाषा सम्मेलन मे। दोनो ने सुनाई आपबीती, एक दूजे के गले लग के‌।। संस्कृत बोली मै रह गई, बनकर वेद पुराण की भाषा। हिंदी बोली हां मै भी रह गई, बनकर सिर्फ राज्यभाषा।। संस्कृत ने ली गहरी सांस, बोली पथराई आंखों से। विद्वानों - गुणीजनो के , जुबान पर थी आसीन।। देश था मेरा सोने की चिड़िया, चमकती थी मां के ललाट पर। कहीं खो गया मेरा वजूद, सिमट कर रह गई किताब तक।। संस्कृत की बातें सुनकर, हिंदी की आंख भर आई। ली उसने भी गहरी सांस, दृवित मन से बोली।। हूं मै देश की मातृभाषा, मुझको ना कोई अपनाता। सबका स्वाभिमान है घटता, जब हिंदी बोलना पड़ता।। देश का गौरव थी मै, थी वीरों की आन-बान-शान। मुझको माथे तिलक लगाकर, खेल जाते अपनी जान पर।। अंग्रेजी हम दोनों के बीच, आ खड़ी हुई, दीवार बनकर। खो रहा हमारा अस्तित्व, कहीं सिमट न जाऊं,मैं भी किताब तक।। आज हिंद का बच्चा-बच्चा, हिंदी बोलने-स...

आसमान मे सुराग

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समय की सीमा लांघकर जो आगे बढ़ जाते है। पत्थर का सीना चीरकर सपनो का महल बनाते हैं।। जुनून के दीये में सकंल्प की बाती जलाते है। तिनका तिनका जोड़कर उम्मीदों के फूल खिलाते है।। सघंर्ष की लौ से कोना कोना महकाते है। धीरज धैर्य से पथ को सरल सुगम बनाते है।। निरन्तर प्रयास से सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं। पग पग धरकर आसमान में सुराग करते है।। ऐसे रणवीर के आगे हार भी नतमस्तक हो जाता है। समय स्वयं उसके वजूद को अपने बाहों से तराशता है।। सफलता पाकर गदगद हो जाते है। विनम्र भाव से जग को रोशन कर जाते है।।