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Showing posts from December, 2021

निरंतर प्रयत्न कर

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तू गम ना कर, थोड़ा धीरज धर। आहिस्ता-आहिस्ता, बस प्रयत्न कर।। खुल जाएगा एक दिन, किस्मत का द्वार। सफलता होगी हासिल, पूरे होंगे अरमान।। गर ना हो विश्वास, याद कर वो कहानी। जिसमें रेस लगी थी, कछुवा खरगोश की।। कछुवा चलता है मन्द-मन्द, यह सोच सो गया खरगोश। तय करेगा आधा सफर जब-तक, एक नींद पूरी कर लूंगा तब-तक।। उठूंगा जब सोकर, दौड़ लगाऊंगा सर-पट। मिनटों में पहुंच जाऊंगा, पूरी करूंगा रेस झट-पट।। पर ऐसा ना हुआ, खरगोश गहरी नींद सो गया। निरंतर मंद-मंद चलकर, कछुवा रेस जीत गया।। टुटा दंभ खरगोश का, कभी ना करो तुम आलस्य। निरंतर प्रयत्न कर, हासिल करो अपना लक्ष्य।।

ग्राम की आबो-हवा

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भोर   हुई    दिनकर   निकला, देख स्वर्णिम-आभा मन उजला। खग - विहंग  करते  कलरव, निद्रा तज किया सूर्य नमन ।। स्वच्छ शान्त वातावरण, हरियाली     सर्वत्र। शुद्ध शीतल हवा बहे, नंगे पांव करें भ्रमण।। सन - सन पवन चले, विटप झूमे मस्ती मे। पुष्प खिले डाली-डाली, खिले रूप बाड़ी-बाड़ी।। भोर कृषक खेत पर जाता, सांझ ढले आता भवन। दिन भर   पसीना   बहाता, फिर भी नित्य रहता प्रसन्न।। पशु स्वच्छंद करें विचरण, अधिक गर्मी पड़ने पर। पोखर मे स्नान कर, करते राहत महसूस सब।। संगी - साथी संग बालक, करते भिन्न-भिन्न  क्रीड़ा। कभी मिट्टी के खिलौने बनाते, और कभी खेलते गुल्ली-डंडा।। सभी बालाएं मिलकर, जल भरती पनघट पर। नीम पर झूला डाल, झूले-झूला,गीत गाए सावन पर।। अम्मा चूल्हे  पर, बनाती दाल-भात। और कभी बनाती, रोटी    -    साग।। घर के आंगन में मिल बैठ, करें हंसी - ठिठोली सब। एक दूजे का सुख-दुख बांटे, सहयोग के लिए रहें तत्पर।। पीपल  की  छांव  मे, चबूतरे पर चौपाल लगे। सब आपस मे साझा करें, अपनी औ ...

क्या आने वाली है सुनामी?

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धीर गंभीर शान्त सागर, क्यों हो गया तूफानी? लहरों में इतना उफान क्यों? क्या कोई जख्म हो गया धानी? कैसी तड़प ? कैसी बेचैनी? क्या आने वाली है सुनामी? भीतर जो कोहराम मचा है, कहीं सूखा ना दे सारा पानी।। विपुल हदय, विशाल तेरी गहराई, फिर कौन सी व्यथा, तेरे स्वाभिमान से जा टकराई।। तू जीवनदायिनी, सुलगना नही तेरा काम। जो भेद गए तेरा अन्तर्मन, नादान समझ करदे माफ।। तुझसे उत्पन्न मैं स्वाति बूंद, हर लू पीड़ा तुझमें समाकर।  पी लू सारा आच्छादित विष, शांत हो जाए तेरा अन्तर्मन।।