चन्द्रमा हठ
दोहा छंद – चन्द्रमा हठ हठ कर बोला चन्द्रमा,माता से इक रात। मैं कुछ कहना चाहता,सुन ले मेरी बात।। प्यारी माॅ॑ बाजार से , ला दे छोटी नाव। जिसमे बैठूं एक दिन, जाऊं नानी गाॅ॑व।। अपने नानी गाॅ॑व से, लाऊं रानी संग। मुखड़ा उसका चाॅ॑द सा, महके सारा अंग।। जीवन साथी हम बने,खेले कूदे साथ। प्यारी माता संग हो,शीश सदा हो हाथ।। माता बोली चाॅ॑द से,मानू तेरी बात। लाऊं नाव विहान मै,पहले बीते रात।। सूरज लाली देख के,लाई माता नाव। उठ जा मेरे लालना,अब जा नानी गाॅ॑व।। प्रियंका त्रिपाठी 'पांडेय' प्रयागराज उत्तर प्रदेश