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Showing posts from March, 2021

विधालय

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मै ऐसा विधालय बनाऊंगी बाबा रामदेव को बुलाऊंगी योग का पाठ पढ़ाएंगे बच्चे हष्ट-पुष्ट हो जाएंगे भारत को रोग मुक्त बनाएंगे//1 मै ऐसा विधालय बनाऊंगी श्री रविशंकर को बुलाऊंगी सभ्यता संस्कार का पाठ पढ़ाएंगे बच्चे संस्कारशील हो जाएंगे भारत की असली पहचान कराएंगे//2 मै ऐसा विधालय बनाऊंगी इसरो के वैज्ञानिक को बुलाऊंगी विज्ञान का पाठ पढ़ाएंगे बच्चे मिसाइल मैन बन जाएंगे भारत मिसाइल का देश कहलाएगा//3 मै ऐसा विधालय बनाऊंगी सचिन धौनी को बुलाऊंगी क्रिकेट का खेल सिखाएंगे बच्चे चौंके छक्के लगाएंगे भारत को विश्व कप दिलाएंगे//4 मै ऐसा विधालय बनाऊंगी मोदी जी को बुलाऊंगी गरिबी मे काबिलियत का पाठ पढ़ाएंगे बच्चे होनहार हो जाएंगे भारत को बुलंदी पर पहुंचाएंगे//5

मृगतृष्णा

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कितना मनोरम दृश्य? देखा मैंने सुंदर मृग। रूचिर नयन रमणीक अंग, आलोकित करता है मन।।१।। इत उत घूम रहा, जाने क्या ढूंढ रहा? दिख रहा बावला सम, क्यों बेचैन तेरा मन?।।२।। गर्मी की चिलचिलाती धूप, पड़ता जब सूर्य प्रकाश। चमकता है रेगिस्तानी रेत, जल का होता है आभास।।३।। प्यास से व्याकुल मृग, आभास मात्र यथार्थ समझ। उसके पीछे भागता रहा, प्यास बुझ जाए आज शायद।।४।। धूल धूसरित लड़खड़ाता, बेसुध हो दौड़ लगाता। बरसात होगी तपती रेत पर, सिसकती रेत से आस लगाता।।५।। मंजिल तक पहुंच जाएगा, जल पीकर प्यास बुझाएगा। सारा जीवन इसी भ्रम में, काट रहा है मृग अपना।।६।। समझ जा नादान मृग, यह है आंखों का भ्रम। नही है कहीं भी जल, क्यों न समझे तेरा मन?।।७।। मृगतृष्णा नही होती पूरी, झांक ले अन्तर्मन। समझ जाए बात अगर, शांत हो जाए तेरा मन।।८।।