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चंद्रशेखर आजाद पर कविता "तुम आज़ाद थे आजाद हो आजाद रहोगे"

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आज चन्द्रशेखर आजाद की पुण्य तिथि (27-2-21) है। मेरी कविता पढ़े...... तुम बाल ब्रह्मचारी, मां भवानी के साहसी सपूत थे। आंखो मे सूरज सा तेज, निर्भीक निडर क्रान्तिदूत थे।। नाम आजाद पिता का नाम स्वाधीन,घर कारावास था। तुम्हारे नाम से अंग्रेजी हुकूमत,भी थर थर कांपा था।। तुमने कहा था!तुम आज़ाद थे आजाद हो आजाद रहोगे। तुमने खाई थी कसम,अंग्रेजो के हाथ कभी नही आओगे।। एक दिन ऐसा आया, जयचंद ने अंग्रेजो से हाथ मिलाया। और अंग्रेजो की टोली ने, तुम्हे चारो तरफ से घेर लिया।। तुमने अपनी प्यारी पिस्तौल उठाई,अंग्रेजो से लोहा लिया। तीन फिरंगियों को मार गिराया, मौत का किंचित भय न था।। अन्त में एक गोली बची, तुम्हे अपनी कसम याद आई। मातृभूमि को चरणस्पर्श कर, अपनी पिस्तौल कनपटी पर लगाई।। मातृभूमि के लिए बलिदान देकर अमर शहीद हो गए।    यह मातृभूमि तुम्हे करती है शत् शत् नमन!    तुम आज़ाद थे आजाद हो आजाद रहोगे।।              वन्देमातरम! जय हिन्द!

दहेज रूपी दानव

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अपनी क्षमता के अनुरूप, धन धान्य से करके परिपूर्ण। पिता ने बड़े अरमानों से, बेटी का रचाया ब्याह।। बहू पहुंची ससुराल, लिए उम्मीदों का थाल। उम्मीद सारे धुआं धुआं हो गए, जब दहेज पर उठे हजार सवाल।। ये नही दिया वो नही दिया, क्यों दिया इतना कम? हमको धोखा दिया, अब भुगतेंगे इसका परिणाम।। बेटियों के लिए बन गया अभिशाप, यह दहेज रूपी दानव। बेटियों पर ज़ुल्म ढहाया जा रहा, मांगे पूरी न होने पर।। कहीं आत्महत्या करने को हो रही मजबूर, तो कहीं जलाकर मार डाला जा रहा। दहेज रूपी दानव को खत्म करने के लिए, सरकार ने ठोस कानून तो बनाया,पर पालन न हो पा रहा।। दहेज लेना वह देना जुल्म है, ऐसा सभी कहते है। वही जब अपनी बारी आती है, तो बेटे की शादी मे लम्बी रकम ऐंठते है।। यह कैसी जागरूकता,इस गम्भीर विषय पर, हमें सोचने की आवश्यकता है। बेटियों को उच्चतर शिक्षा दिलानी है, जिससे होने वाले जुल्म का,वह सामना कर सकती है।। बेटियों को काबिल बनाना है, साथ ही दहेज न देने की शपथ खाना है। जहां दहेज मांगा जाएगा, वहां बेटी का ब्याह नही रचाना है।।