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रत्नवती का आंचल हो गया मलिन

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22 अप्रैल विश्व पृथ्वी दिवस की सभी को हार्दिक बधाई 🌴🌳🌲🌾🥀🌻🌿☘️🏔️💧🌈🌍 नवरत्न जड़ित सोलह श्रृंगार कर, स्वर्ग से उतरी नववधू-सी। धानी चुनर ओढ़कर, हरीतिमा फैलाती रत्नवती।। शिव जटा से धरा पर उतर कर, वसुंधरा को करती तृप्त। जन-जन की प्यास बुझाती, कल-कल बहती अमरतरंगिनी।। झम-झम मेघ बरसता, पुलकित होती प्रकृति। हरित तृण बिखेरती सुषमा, चित्त लगाता नीलांबरी।। मन्द-मन्द मधुर तरंग, तरू-पल्लव संग करती अठखेली। सांसों मे बसती प्राणदायिनी, निर्मल-निर्झर बहे शुद्ध स्पर्शन।। बाड़ी कानन दमकता, और बिखेरता गंध। सघन छांव मे देते ठावं, पुहुप पर्ण सुषोभित द्रुम।। तेरा आंचल हो गया मलिन, तेरी सुषमा भी रंगविहीन। चंचल मन हो गया उदास, वसुंधरा अब रहती निराश।। जाह्नवी हो गई प्रदुषित, अस्वच्छ बहे  पवन। कुल्हाड़ी से काट रहे कानन, अवनी हो गई बंजर।। ना बचे अब कांतार, परिंदों का खतरे में प्राण। जो न जागा अब इन्सान, मिट जाएगा नामोनिशान।।

सांझ धरा का मिलन

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स्वर्ण रथ पर सवार, दुल्हा सा बन- ठन। दमक रहा दिनकर, पहन केसरिया वसन।। प्रकृति रही निहार, कर नव-वधू श्रंगार। सिंदूरी रंग रंगा अंबर, बिछा रहा पितांबर।। सजा स्वर्णिम सेज, शिथिल पग,प्रतिची आकृष्ट। सांझ-धरा का मिलन, हो रहा क्षितिज पर।। पशु  पक्षी, लौट रहे गेह। गोधीली बेला, दे रहे संदेश।। नदी  तीरे   सुन्दरी, देख स्वर्णिम-आभा। लजाती    मुस्काती, देख सपनो का राजा।। शीतल बयार, भ्रमर गुंजन। टकराते पात - पात, जैसे नटि करे नर्तन।। घना तम चादर, बिछा रहा नभ। मुस्काया चन्द्र। झिलमिलाए तारक-गण।। ज्योति प्रखर, चन्द्रिका संग। कर रहे विश्राम, सभी श्रान्त मन।।

भावना मे बहकर

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भावना में बहकर

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भावना में आकर, ना चुनना मंजिल। भावना मे बहकर, कब कहां किसे मिली है मंजिल? जो भावन में बह गया, चुन लिया अलग रस्ता। अलग रस्ते पर जाकर, कब कहां किसे मिला सही रस्ता? भावना में बहकर, चल पड़ा दुर्गम पथ पर। फिर कहां चैन 'औ' आराम, अब तो है संघर्ष ही संघर्ष।। तन-मन टूट कर बिखर जाता, इंसा रह जाता है अकेला। उम्मीदे टूट जाती, टूट जाता हर सपना।। भावुकता मे ना लेना, कभी भी ग़लत फैसला। खुद भी हो जाओगे जार-जार, अपनो का भी छुटेगा साथ।।

कामयाबी क्या है?

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वो कामयाबी ही किस काम की, जो सिर्फ अपने ही काम आए। अपनों को छोड़-छाड़ कर, दूर देश मे ठाॅव बनाए।1। वो मंजिल ही किस काम की, जो सिर्फ खुद को खुशी दे। अपनों का दिल दुखाकर, जीवन भर तड़पता छोड़ दें।2। वो पहचान ही किस काम की, जो अपनी पहचान कराए। जिसके जरिए मिली कामयाबी, उसकी ही पहचान छुपाए।3। सच्ची कामयाबी वो है, जो अपनों संग खुशियां बांटें। अपना जीवन तो सुधारें ही, औरों का भी जीवन सुधार दे।4। अपनो संग अपने देश मे, अपनी पहचान बनाए। कामयाबी ऐसी गढ़ दे, जो मील का पत्थर बन जाए।5।

बंदर मामा

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मदारी का बंदर

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मुस्कान

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जिन्दगी जीने के लिए, जीवन को सरल बनाना जरूरी है। जीवन सरल - सुगम बने, उसके लिए मुस्कुराना जरुरी है।। भले ही पंथ, कंटक से भरा हो। हदय घावो से छलनी हो, मुस्कुराते हुए जीवन जीना जरूरी है।। एक मुस्कान हजार, बिमारियों की दवा है। ऐसी दवाई को, हदय से लगाना जरूरी है।। जिसके पास हो यह हुनर, वह होता है सबका खास। उसकी एक छवि पाने को, हर कोई रहता है बेकरार।।