दहेज रूपी दानव
अपनी क्षमता के अनुरूप,
धन धान्य से करके परिपूर्ण।
पिता ने बड़े अरमानों से,
बेटी का रचाया ब्याह।।
बहू पहुंची ससुराल,
लिए उम्मीदों का थाल।
उम्मीद सारे धुआं धुआं हो गए,
जब दहेज पर उठे हजार सवाल।।
ये नही दिया वो नही दिया,
क्यों दिया इतना कम?
हमको धोखा दिया,
अब भुगतेंगे इसका परिणाम।।
बेटियों के लिए बन गया अभिशाप,
यह दहेज रूपी दानव।
बेटियों पर ज़ुल्म ढहाया जा रहा,
मांगे पूरी न होने पर।।
कहीं आत्महत्या करने को हो रही मजबूर,
तो कहीं जलाकर मार डाला जा रहा।
दहेज रूपी दानव को खत्म करने के लिए,
सरकार ने ठोस कानून तो बनाया,पर पालन न हो पा रहा।।
दहेज लेना वह देना जुल्म है,
ऐसा सभी कहते है।
वही जब अपनी बारी आती है,
तो बेटे की शादी मे लम्बी रकम ऐंठते है।।
यह कैसी जागरूकता,इस गम्भीर विषय पर,
हमें सोचने की आवश्यकता है।
बेटियों को उच्चतर शिक्षा दिलानी है,
जिससे होने वाले जुल्म का,वह सामना कर सकती है।।
बेटियों को काबिल बनाना है,
साथ ही दहेज न देने की शपथ खाना है।
जहां दहेज मांगा जाएगा,
वहां बेटी का ब्याह नही रचाना है।।
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