रानी पद्मावती का जौहर
सुनो सुनाऊं एक दासता,
रानी पद्मावती के जौहर की।
क्यों शोणित कुर्बानी दी,
जो चित्तौड़ की महारानी थी।।१
राघव चेतन फनकार,
करता था यंत्र-मंत्र।
रंगे हाथों पकड़ा गया,
राणा ने किया बहिष्कृत।।२
अपमानित राघव चेतन,
अलाउद्दीन से जा मिला।
रानी पद्मिनी के सौंदर्य का
खिलजी से बखान किया।।३
आकर्षक व्यक्तित्व अलौकिक सौंदर्य,
झील सी आंखे परियों सा रूप।
अप्सराएं भी करती ईष्र्या,
देवता भी हो जाएं मुग्ध।।४
सुन पद्मावती की सुंदरता,
डोल गया अलाउद्दीन का मन।
रानी पद्मिनी को अपना बनाने का,
मन ही मन सुल्तान ने किया प्रण।।५
देख कमल सरोवर मे,
रानी पद्मावती का अक्स।
अधर्मी कर बैठा अधर्म,
छल से राणा को लिया पकड़।।६
चित्तौड़ भिजवाया पैगाम,
रानी को पहुंचाओ दिल्ली।
रानी आ जाए मेरे हरम तक,
बख्श दूंगा राणा की जिंदगी।।७
रानी पद्मा ने दिखाई दूरदर्शिता,
कपटी सुल्तान को भेजा संदेश।
मेरी शर्त सात सौ दासियों संग,
रावल रतन सिंह से करुंगी भेंट।।८
चित्तौड़ सैनिक बैठे पालकी मे,
स्त्री का सोलह श्रृंगार कर।
छल का छल से दिया जवाब,
रावल को कैद से छुड़ा कर।।९
अलाउद्दीन हुआ क्रोधित,
छेड़ दिया भीषण जंग।
मारे गए रावल रतन सिंह,
चित्तौड़ मे छाया तम।।१०
सुन रानी समझ गई,
अब बचे हैं दो विकल्प।
विजयी सेना से सहे निरादर,
या जौहर के लिए हो प्रतिबद्ध।।११
कुलीन रानी ने राजपूतानियो संग,
गोमुख सरोवर मे किया स्नान।
कुल देवी की पूजा अर्चना कर,
वीरांगनाओं ने किया सोलह श्रृंगार।।१२
राजपूत रमणियो ने आन-बान हेतु
किया जौहर रानी पद्मावती संग।
अलौकिक देवदुर्लभ सौंदर्य, अग्नि
लपटों में होकर स्वहा बन गया कुंदन।।१३
भारतवर्ष सदैव याद रखेगा,
रानी पद्मावती का जौहर।
स्त्री जगत को बता गई,
आत्मसम्मान है असली जेवर।।१४
छली कपटी अधर्मी खिलजी,
ने दुर्ग में जब प्रवेश किया।
राख जली हड्डियों के सिवाय,
म्लेच्छ को कुछ नही मिला।।१५
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