क्या आने वाली है सुनामी?
धीर गंभीर शान्त सागर,
क्यों हो गया तूफानी?
लहरों में इतना उफान क्यों?
क्या कोई जख्म हो गया धानी?
कैसी तड़प ? कैसी बेचैनी?
क्या आने वाली है सुनामी?
भीतर जो कोहराम मचा है,
कहीं सूखा ना दे सारा पानी।।
विपुल हदय,
विशाल तेरी गहराई,
फिर कौन सी व्यथा,
तेरे स्वाभिमान से जा टकराई।।
तू जीवनदायिनी,
सुलगना नही तेरा काम।
जो भेद गए तेरा अन्तर्मन,
नादान समझ करदे माफ।।
तुझसे उत्पन्न मैं स्वाति बूंद,
हर लू पीड़ा तुझमें समाकर।
पी लू सारा आच्छादित विष,
शांत हो जाए तेरा अन्तर्मन।।
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