मौन रहकर आगे बढ़ना सीखा



मैंने मौन रहकर कदम बढ़ाना सीखा।
मैंने नदी की धार सा निरंतर बढ़ना सीखा।।

मैंने तिनका तिनका जोड़कर अरमानों को सीना सीखा।
मैंने पग पग पर उम्मीद का दीया जलाना सीखा।।

मैंने पखं पसारकर आसमान मे उड़ना सीखा।
मैंने सपनो मे रंग भरने का हौसला सीखा।।

मैंने गिरकर उठना उठकर संभलना संभलकर चलना सीखा।
मैंने चट्टान बनकर मुसीबतों से टकराना सीखा।।

मैंने कांटों मे भी खुशबू फैलाना सीखा।
मैंने हंसते हंसते जख्मों को भरना सीखा।।

मैंने मन की गहराई से जिंदगी का सबक सीखा।
मैंने तिमिर में भी रश्मियां फैलाना सीखा।।

मैंने मौन रहकर कदम बढ़ाना सीखा।
मैंने मौन रहकर आगे बढ़ना सीखा।।

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