मनमोहिनी




मन को छू ले ऐसी है काया।
ऐसे ही फलती रहे देती है छाया।।

तुझे बार बार मै देखूं।
मन ही मन पुलकित हो जाऊं।।

तु जूही चम्पा चमेली।
झूमे अमवा की डाली।।

नदियां बरखा तेरी सहेली।
हवाओं संग खेले अठखेलि।।

तु जीवन दान देती।
सुधा रस बरसाती।।

हे मनमोहिनी तुझे!
कभी कलम से पिरोऊ।
कभी चित्रो से सवारू।
ऐसे ही फलती रहे देती है छाया।।
            

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