प्रार्थना

हे प्रभु तू ले रहा,
यह कैसा इम्तिहान?
हर दिशा है विरान,
इंसा हो रहा परेशान।।

यह कैसा कहर ढा रहा?
हर शख्स घबरा रहा।
जान पर बन आई है,
क्या कीमत लगाई है?

माना हो गई बहुत,
हमसे गलतियां।
ऐशो आराम के लिए,
उजाड़ी हमने बस्तियां।।

धरा को किया छिन्न,
प्रकृति से किया भिन्न।
बंजर हो गई धरती,खतरे
में जीवो का अस्तित्व।।

तू है दाता,
भाग्य विधाता।
कर दे हमें माफ,
समझ के अज्ञान।।

हम है तेरे भक्त,
हमे दे तू बक्ष।
बचा ले जिन्दगी,
यही हमारी बंदगी।।


Comments

Popular posts from this blog

रानी पद्मावती का जौहर

मौन रहकर आगे बढ़ना सीखा

चकोर का संकल्प: चांद