मित्र
मित्र वही जो मुसीबत में,
साथ दे हर बार।
बाधाएं कितनी भी आए,
मुंह न फेरे एक भी बार।।
मित्र वही जो सच्चाई,
का मार्ग दिखाए।
यदि हम सुदामा हैं,
तो स्वयं कृष्ण बन जाएं।।
मित्र वही जो मित्र के लिए,
हर पल मुस्कुराए।
कितने भी शूल चुभे,
कर्ण सा न्योछावर हो जाए।।
मित्र वही जो अंधेरों में,
उम्मीद की लौ जलाए।
द्रौपदी की लाज बचाने,
कृष्ण सा अन्तर्मन से दौड़ा आए।।
मित्र वही है सच्चा जो,
ख्वाबो को नई उड़ान दे।
दुख के आंसू पोंछकर,
हिम्मत हौसला बांध दे।।
सबको ऐसा मित्र मिल जाए,
जीवन खुशियों से भर जाए।
कठिन से कठिन राह भी,
सुगम सरल हो जाए।।
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