सेनानी लड़कियां
लड़कियों की सेना,
उड़ चली गगन मे।
देश पर मर-मिटने की,
हमने खाई कसमें।।
बांधकर सर पर कफ़न,
निकले घर से हम।
आंच ना आने देंगे,
अपनी मातृभूमि पर हम।।
अतल-वितल या हो तल,
सब जगह हमारी निगाहें।
गोलियों से देंगे भून गर,
मातृभूमि की ओर उठी निगाहें।।
आसमान के परिंदे,
गर्जन से नही डरते।
अपने पर आ जाएं,
सिंह सा हूंकार भरते।।
बाज सा लेकर हौसला,
आसमान में हम उड़ते।
अहि सामने आ जाए,
पाताल उसको पहुंचाते।।
हमारे बाजुओं मे दम,
नही किसी से कम।
हम सेनानी लड़कियां,
आसमान हमारा घर।।
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