भारत की विरासत हिंदी
संस्कृत गर्भ से जन्मी है,
सनातन पुरातन हिंदी भाषा।
भारतम्बा भाल पर चमत्कृत,
स्वाभिमानी गौरवमई मातृभाषा।।
सोने की चिड़िया सम विख्यात,
थी अपनी राष्ट्रभाषा।
सूर तुलसी जायसी ने रची,
इसमें असंख्य गाथा।।
पावन भारत भूमि पर,
हुआ अंग्रेजों का आगमन।
अंग्रेजी हुकूमत ने किया,
मातृभाषा का बेड़ा-गरग।।
अंग्रेजी ने गड़ाए पांव,
हिंदी का हो रहा पतन।
कुछ साहित्य प्रेमियों ने,
हिंदी बचाने की खाई कसम।।
पतं का प्रकृति प्रेम,
प्रेमचंद की कालजई कहानियां।
दिनकर का ओज क्रांति,
भारतवासी के सिर चढ़कर बोला।।
मीरा का स्फुट भक्ति रस,
सुभद्रा की राष्ट्रीय चेतना।
महादेवी आधुनिक मीरा,
सब ने रची हिंदी रचना।।
हिंदी सरल समृद्ध,
भारत की विरासत।
संस्कृति से परिपूर्ण, करती
हिन्दुस्तान के हिफाजत।।
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