हिंदी का अलख जगाएं
"वागेश्वरी मां कर जोड़ करूं वन्दन,दिजीए मुझको भाषा ज्ञान।
समझ सकूं तुम्हारी वीणा से,निकले सुर लय और तान।।"
विश्व गुरु के विश्व पटल पर,
चमत्कृत अलंकृत हिंदी भाषा।
रस छंद अलंकार जिसमे विद्ममान,
सरल सरस सुमधुर हमारी मातृभाषा।।
संस्कृत से उपजी संस्कारशील भाषा,
सीखने आते अन्यत्र देश के शागिर्द।
ऋषि मुनियों की यह पावन भूमि,
जहां जन्मे श्री राम और कृष्ण।।
मातृभूमि सम पवित्र मातृभाषा हिंदी,
जिसमें लिखे असंख्य काव्य - ग्रंथ।
वेदो की भाषा पुराणों की वाणी,
जहा समझते समझाते मुनि-संत।।
आओ हिन्दी को आत्मसात कर,
जन-जन तक हिंदी का जगाएं अलख।
बच्चा-बच्चा समझे बच्चा-बच्चा जाने,
हिंदी का मर्म और हिंदी का गौरव।।
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