मात-पिता गुरूवर
सर्वप्रथम मेरे कोंपल मन में,
माता ने जगाया शिक्षा का अलख।
सदाचार का पाठ पढ़ाकर,
मेरे जीवन को किया उन्नत।।
पिता ने हौंसला बढ़ाकर,
वाह्य जगत का दिया ज्ञान।
जग में कैसे जीना है?
कराया इसका भान।।
गुरूवर ने देकर विद्या-ज्ञान,
फैलाया जीवन में प्रकाश।
सिखाया कैसे करें मन केन्द्रित?
लक्ष्य पाना हो जाए आसान।।
गुरु कृपा है एक उपहार,
जो मिले गुरु आशीर्वाद।
जीवन रूपी सागर खेना,
हो जाए अत्यंत आसान।।
मात-पिता गुरूवर सभी है,
बालक के अनिवार्य शिक्षक।
देकर बालक को उचित ज्ञान,
सजाते - संवारते जीवन।।
मात-पिता गुरूवर को,
कर जोड़ करूं प्रणाम।
कृपा दृष्टि आपकी बनी रहे,
करें हम पर उपकार।।
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