लघुकथा पूत-कपूत


एक बार एक गांव मे भूकंप आया जिससे खेत के दो टुकड़े हो गए। कलेक्टर साहब अपनी टीम के साथ उस स्थान का मुआयना करने आए। अपनी टीम से बाते कर रहे थे कि "अरे खेत के तो दो टुकड़े हो गए"। कुछ ही दूरी पर बैठा एक बूढ़ा आदमी उनकी सब बाते सुन रहा था और बोला "जब पूत कपूत होइ जाई त माई क कलेजा न फाटे"।उस बूढ़े आदमी की बाते सुनकर कलेक्टर साहब तथा टीम के सभी सदस्यों की नजरें झुक गई।


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