भावना में बहकर




भावना में आकर,
ना चुनना मंजिल।
भावना मे बहकर,
कब कहां किसे मिली है मंजिल?

जो भावन में बह गया,
चुन लिया अलग रस्ता।
अलग रस्ते पर जाकर,
कब कहां किसे मिला सही रस्ता?

भावना में बहकर,
चल पड़ा दुर्गम पथ पर।
फिर कहां चैन 'औ' आराम,
अब तो है संघर्ष ही संघर्ष।।

तन-मन टूट कर बिखर जाता,
इंसा रह जाता है अकेला।
उम्मीदे टूट जाती,
टूट जाता हर सपना।।

भावुकता मे ना लेना,
कभी भी ग़लत फैसला।
खुद भी हो जाओगे जार-जार,
अपनो का भी छुटेगा साथ।।


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