मां अचला बोली
वीरो की शहादत पर आज मां अचला पहुंची,
देख वीरों की शहादत कुछ इस तरह मचली।
बोली धन्य है वीरो धन्य तुम्हारी जन्मदात्री,
कैसे चुकाऊंगी यह ऋण ? कृतज्ञ हूं तुम्हारी।।
शत् शत् नमन करती तुम्हें मां भारती,
जले जगमग दीप उतारूं तुम्हारी आरती।
अमर हो गए तुम,मुझमे दफन हो गए तुम,
धन्य हुई मेरी कोख धन्य हुई मां भारती।।
निज प्राणो की चिन्ता ना तुम्हें कभी सताती,
सीमाओ की रक्षा करते अहि का सीना चीर।
उत्तुंग शिखर पर डटे रहते हो पाषाण बन,
देश पर बुरी नजर डाले अरि की ऐसी नही तासीर।।
तुमसे ही सलामत यह धरती है,
तुमसे ही आती माटी मे खुशबू है।
तुमसे ही लहर लहर लहराए तिरंगा,
तुमसे ही पावन आकाश और गंगा।।
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