बेच दिया अपना इमान
देश पर जब भी होगा अत्याचार,
मैं कलम की धार से करूंगी उस पर वार।
नं रूकूंगी न थकूंगी बार-बार लिखूंगी,
क्यों बेचते हो चंद सिक्कों में अपना इमान?
जब देश फूलेगा तुम भी फूलोगे,
जब देश न रहेगा तुम भी न रहोगे।
इतिहास गवाह है जिसने भी की गद्दारी,
उसका हमेशा ही नामों निशान मिटा है।।
करोड़ों लूटकर दूसरे देश जब जाओगे,
अपने देश का क्या हाल सुनाओगे।
चोर नज़र से बार-बार देखे जाओगे,
वहां भी तुम कपटी चोर ही कहलाओगे।।
इसलिए कहती हूं ले लो संज्ञान,
नही तो तुम भगोड़ा कहलाओगे।
नजरें चुराओगे,बार-बार पछताओगे,फिर कहोगे!
क्यों बेच दिया चंद सिक्कों के लिए अपना इमान।।
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