बालश्रम
गरीबी ने किया मां को मजबूर,
अबोध तनय बन गया मजदूर।
मां की आंख नम, ममता भी रोती है,
नन्ही गुड़िया जब जूठे बर्तन धोती है।।१
ना मिली आंचल की छाॅ॑व,
ना मिला बाबा का ठाॅ॑व।
क्या जानू कैसी होती लोरी?
क्या जानू कांधे की घोड़ी?२
गली कूचों में घूमता रहता,
लेकर किस्मत मैं खोटी।
बेदर्द जमाना समझे ना,
मुंह पर फेंके बासी रोटी।।
काला है कर मैला है तन,
घृणित नजरो से देखें जन।
कोई ना बोले मीठे बोल,
लाचार चोर समझे हर मन।।४
कैसी होती है परी कहानी?
कैसा होता है भोला बचपन?
कैसे पकड़ते कलम दवात?
कैसे लिखते कागज पर सच?५
जी करता बन जाऊं कलाम,
लेकर कलम लिखूं कलाम
पंख पसार उड़ूं आसमान,
बन जाऊं मैं भी विद्वान।।६
भर आया हदय में ज्वार,
आंखो से उगले अंगार।
नादान करे खुदा से प्रश्न,
कैसे भरे हैं जीवन में रंग ?७
मासूम के सपने चढ़ गए,
सब बालश्रम की भेंट।
बच्चों को कहते हैं भगवान,
भगवान जी रहा खाली पेट ।।८
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