आदिदेव महादेव



हे आदिदेव महादेव,
आ जाओ धर अवतार।
अब नही सम्भलती दुनिया,
बढ़ रहा अत्याचार।।

चारो ओर अतिक्रमण,
 चरम पर है भ्रष्टाचार।
धोखा फरेब हर जगह,
स्वार्थी हो गया संसार।।

हे शिवशम्भू अर्द्धनारीश्वर,
अब तो खोलो त्रिनेत्र,
देखो नारीयों पर अत्याचार।
बच्चियों का हो रहा शोषण,
हर जगह बढ़ रहा व्यभिचार।।

हो गया सड़क पर चलना दूभर,
है भेड़िए की खाल मे हर इंसान।
किस पर भरोसा करें,किस पर ना करें,
पुरूष बनता जा रहा वहशी हैवान।।

हे जटाधारी त्रिपुरारी शिव शंकर,
करो तांडव मचा दो हाहाकार।
लेकर त्रिशूल धरो रौद्र रूप,
कर दो दरिंदों का नरसंहार।।

हे नीलकंठ करो विषपान,
जगत मे जितना है विषव्याप्त।
लादो प्रलय! करो उन्माद,
पापीयों का हो जाए नाश।।

यह सृष्टि हो जाए,
फिर से सुदृढ़ शांत।
सबके दिलो मे बसे प्यार,
भोले बाबा की हो जयकार।।


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